मेरा नाम अंकित है मैं बुंदेलखंड महाविध्यालय झाँसी उत्तर प्रदेश का हिन्दी  का छात्र रहा  हूँ  

मित्रता क्या  है 

मित्रता हमारे जीवन को बना सकती है मिटा सकती है 

मित्र का हमारे जीवन मैं बहुत गहरा प्रभाव होता है

मित्रता हमारे जीवन का आधार स्तभ कहा जा सकता है 

सच्ची मित्रता 


सच्चा मित्र विश्वास करने योग्य, सही मार्ग बताने वाला और भाई के समान निष्कपट प्रेम करने वाला होता है। हमारी और हमारे मित्र की आपस में सच्ची सहानुभूति होनी चाहिए जिससे वह हमारे हानिलाभ को अपना हानि-लाभ समझे और हम उसके हानि-लाभ को अपना। तात्पर्य यह है कि सच्ची मित्रता में सच्चा स्नेह होना चाहिए।

सच्चे मित्र के कर्तव्य 

एक मित्र होने का अर्थ यह नहीं है कि आप किसी मजाक, बातचीत, एक चाय का कप या एक गुदगुदाती कहानी का हिस्सा बनें। बल्कि इसका मतलब है अपने सच्चे और ईमानदार हिस्से को साझा करना। मित्रता महज एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक बड़ा उत्तरदायित्व है जिसे दोनों पक्षों को स्वेच्छा से ओढना पड़ता है। मित्र का कर्तव्य इस प्रकार बताया गया है : "उच्च और महान कार्य में इस प्रकार सहायता देना, मन बढ़ाना और साहस दिलाना कि तुम अपनी निज की सामर्थ्य से बाहर का काम कर जाओ।" 

मित्रता हानी 

मित्र कितना ही प्रिय क्यों ना हो उसपर जीवन के उन रहस्यों को उजागर करना अनुचित होता है जिनके प्रत्यक्ष होने से समाज में सम्मान की हानि हो सकती हो क्योंकि कभी मित्र से मन मुटाव हो जाए अथवा मित्र के मन में स्वार्थ जाग जाए तो वह रहस्यों के बल पर नुकसान पहुंचा सकता है तथा समाज में रहस्यों को उजागर करके जीबन बर्बाद कर सकता है । जीवन में कितना भी प्रिय मित्र हो उस पर अंधविश्वास करना बहुत बुरा एवं मूर्खता पूर्ण कार्य है क्योंकि अंधविश्वास से ही विश्वासघात का रास्ता आरम्भ होता है ।



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