भारत स्वाभिमान चाहिए


 अंधेरों को अब नया ,दिनमान चाहिए।

अपनी ही खोई हुई, पहचान चाहिए। ।

महगाई भ्रष्टाचार से , संतृप्त हुआ देश ।

अब नया ही हमको, हिंदुस्तान चाहिए।।

अपना ही आकाश है ,अपनी ही जमी है ।

एक नए विश्वास की , पहचान चाहिए।।

खामोश समुंदर से अब काम नहीं चल सकता।

हर दिल में अब नया ही  तूफान चाहिए ।।

नव भारत के निर्माण के लिए ।

हर एक व्यक्ति को भारत स्वाभिमान चाहिए।।


Post a Comment

Previous Post Next Post