आत्म बोध

 अभी न हारो मेरी अच्छी आत्मा 

अभी तो चेतन्य है अधुरा मेरा 

सपना डरा है अभी अधवना 

अभी न हारो मेरी अच्छी आत्मा ,


अभी से क्यों हारती हो आत्मा 

अभी तो चेतन्य है अधुरा 

सपना है अभी अधवना 

तुम्ही तो हो जो निराशा ,

मै भी भरती हो आशा 

अभी से न हारो मेरी आत्मा 

असंख्य से है सपने 

असंख्य रास्ते 

चलना तुम्ही ने है सिखाया 

चेतन्य तुम्ही ने है दिया 

अभी से न हारो मेरी अच्छी आत्मा |



Post a Comment

Previous Post Next Post