एक पल न रूकती
इस और से उस और
इस फूल से उस फूल
सभी पे मंडराती
ना रूकती मैं ना थकते-
कोमल पंख मेरे
काश मैं तितली होती
एक पल न रूकती
रंग बिरंगे फूलों से मैं
दोस्ती का रस चखती
काश मैं तितली होती
एक पल न रूकती
हवा की लहरों में
लहराते पंख मेरे
काश में तितली होती
एक पल न रूकती
इस कविता के माध्यम से मनुष्य का मन कितना चंचल होता है ये व्यक्त करने का प्रयास किया है
Super 👌🏻👌🏻👌🏻😇
ReplyDeleteVery nice poem
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