मरते -मरते जीवन की दुआ देती है मां

 


कब्र के आगोश में जब थक कर सो जाती है "मां"

तब कहीं जाकर , सुकून पाती है "मां"

फिक्र मैं बच्चों की कुछ ,ऐसे ही घुल जाती है "मां"।

नौजवां होते हुए भी , बूढ़ी नजर आती है "मां"।।

रूह के रिश्तों की , गहराइयां तो देखो ।

चोट लगती है हमको, और बिलख जाती  है "मां"।।

घर से परदेश जाता है ,जब नूरे नजर ।

लव पे दुआ लेकर , दर पे आ जाती है "मां"।।

जब परदेश में परेशानी से , घिर जाते है हम।

अंशुओ को पोंछने , सपनों मैं आ जाती है "मां"।।

शुक्रिया हो नहीं सकता कभी मां का अदा ।

मरते- मरते भी दुआ जीने की दुआ दे जाती है "मां"।।



1 Comments

  1. Jindgi ki anmol cheez hai MAA 👌🏻👌🏻👌🏻❤️👌🏻👌🏻

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