कब्र के आगोश में जब थक कर सो जाती है "मां"
तब कहीं जाकर , सुकून पाती है "मां"
फिक्र मैं बच्चों की कुछ ,ऐसे ही घुल जाती है "मां"।
नौजवां होते हुए भी , बूढ़ी नजर आती है "मां"।।
रूह के रिश्तों की , गहराइयां तो देखो ।
चोट लगती है हमको, और बिलख जाती है "मां"।।
घर से परदेश जाता है ,जब नूरे नजर ।
लव पे दुआ लेकर , दर पे आ जाती है "मां"।।
जब परदेश में परेशानी से , घिर जाते है हम।
अंशुओ को पोंछने , सपनों मैं आ जाती है "मां"।।
शुक्रिया हो नहीं सकता कभी मां का अदा ।
मरते- मरते भी दुआ जीने की दुआ दे जाती है "मां"।।
Jindgi ki anmol cheez hai MAA 👌🏻👌🏻👌🏻❤️👌🏻👌🏻
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